क्या आप जानते हैं कि प्रोटीन कि कमी से मानव शरीर का क्या हाल होता है

प्रोटीन-

प्रोटीन नाम सर्वप्रथम सन 1838 में डच वैज्ञानिक मुल्डर (Mulder) द्वारा प्रस्तावित किया गया इस शब्द का उद्गम ग्रीक भाषा के “प्रोतियोस” (Proteose) शब्द से हुआ जिसका आशय है ‘पहले आने वाला’ (to take first place) यह नाम इसलिए प्रस्तावित किया गया क्योंकि उस समय भी यह तत्व जीवन के लिए सबसे प्रमुख तत्त्व माना जाता था | बिना इसके जीवन सम्भव नहीं है ऐसा माना जाता था |

प्रोटीन कि मात्रा भार से लगभग 14-16 प्रतिशत तक होती है ये कार्बन,हैड्रोजन,आक्सीजन तथा नाइट्रोजन के यौगिक हैं | अधिकांश प्रोटीन्स में गंधक तथा फास्फोरस भी पाए जाते है|प्रोटीन को बनाने वाली इकाईयां, जिन्हें अमीनो अम्ल(amino acid) कहते है|

प्रोटीन कि कमी से होने वाली बीमारियाँ-
  1. बालों का टूटना
  2. थकान
  3. कब्ज
  4. मांसपेशियों में कमजोरी
  5. कम रक्तचाप
  6. दस्त का हो जाना बार बार
  7. वजन का कम होना
  8. त्वचा पर चकत्ते
  9. अत्यधिक नींद
  10. नाजुक नाख़ून
  11. उदासीनता
  12. घाव भरने में परेशानी
  13. लगातार संक्रमण
  14. बालो का रंग हल्का हो जाना आदि |
प्रोटीन के मुख्य स्रोत- 
  1. बीन्स
  2. दाल
  3. बादाम
  4. मेवे और  मूंगफली का मक्खन
  5. सोया का दूध
  6. मांस
  7. अंडा
  8. दूध
  9. हरी सब्जियां आदि |
प्रोटीन का पाचन(Digestion of Protein)-
  • आमाशय में पाचन- प्रोटीन का पाचन अम्लीय माध्यम में (HCLअम्ल की उपस्थिति में) पेप्सीन  नामक एंजाइम के द्वारा अमाशय में प्रारंभ होता है यह एंजाइम  जठर रस में होता है | इसके प्रभाव से प्रोटीन्स तथा  पॉलीपेप्टाइड में टूट जाते हैं | सामान्यत: इससे अधिक पाचन आमाशय में नहीं होता दूध की प्रोटीन पर पेप्सिन की क्रिया का प्रभाव तभी होता है जब रेनिन नामक एंजाइम इसे दूध से अलग कर देता है यह एंजॉय भी जठर रस में ही होता है|
  • ग्रहणी में पहचान- ग्रहणी में प्रोटीन से प्राप्त अवयवो पर क्रिया, छारिये माध्यम (पित्त रस की  उपस्थिति) में होती है यंहा, यह क्रिया  अग्नाशय  रस के ट्रिप्सन  नामक एंजाइम के द्वारा होती है इसके द्वारा पॉलीपेप्टाइड पप्टोंस आदि को अमीनो अम्ल में तोड़ दिया जाता है अमीनो अम्ल ही प्रोटीन का पूर्ण पाचित स्वरूप हैं |
  • आंत्र  के शेष भाग में अन्त्रीये रस के द्वारा पाचन-प्रोटीन के अर्द्पचित अवयवो  पर छोटी आंत  में आने  वाला आंत्र रस के इरेप्सिन  नामक एंजाइम के प्रभाव से भी अमीनो अम्ल बनते हैं |

 

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